Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

Breaking :

latest

छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी मत्स्य हब: केंद्रीय सचिव लेखी

  भारत सरकार के 900 और राज्य सरकार के 300 करोड़ से मत्स्य क्रांति को मिली रही गति तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने प्रदेश में रायपुर, धमतरी और कांके...

यह भी पढ़ें :-


 भारत सरकार के 900 और राज्य सरकार के 300 करोड़ से मत्स्य क्रांति को मिली रही गति

तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने प्रदेश में रायपुर, धमतरी और कांकेर कलस्टर होगा विकसित 

पीएम मत्स्य संपदा योजना से 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत 

आधुनिक तकनीक, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र एवं राज्य का विशेष फोकस

रायपुर, 20 अगस्त 2026 -केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव  अविलक्ष्य लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के मत्स्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। योजना के विभिन्न घटकों के माध्यम से राज्यों के मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता एवं अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे एवं मध्यम श्रेणी के ऐसे मत्स्य किसान, जिनकी बैंकिंग सेवाओं तक सहज पहुंच नहीं हो पाती, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।

केंद्रीय सचिव  लेखी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इन्हें साकार करने के लिए केंद्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों में 34 मत्स्य क्लस्टरों का विकास करने जा रही है। इनमें छत्तीसगढ़ में तिलापिया कलस्टर शामिल है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य के मत्स्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 900 करोड़ रुपये व्यय और स्वीकृत कर चुकी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और तिलापिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में उत्पादित मछलियों का निर्यात आयरलैंड, शिकागो सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो रहा है। प्रदेश में 2 हजार से अधिक किसान तिलापिया पालन कर रहे हैं। इन किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए एक्सपोजर विजिट की कार्ययोजना तैयार करने, उन्नत गुणवत्ता के मत्स्य बीज उत्पादन हेतु नई हैचरियों की स्थापना तथा आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मत्स्य किसानों से संवाद कर उनके सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, मछलीपालन विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य आज मत्स्य बीज उत्पादन में देश में चौथे तथा मछली उत्पादन में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। प्रदेश में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 2021 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियां, 1662 स्व-सहायता समूह, 123 मत्स्य हैचरियां, 102 मत्स्य बीज उत्पादन फार्म तथा 4 थोक मत्स्य बाजार संचालित हैं।

 परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पिछले छह वर्षों में राज्य के लिए 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 272.37 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर, तालाब निर्माण, लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, फीड मिल और अन्य आधुनिक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। कोरबा जिले के बांगो जलाशय में 37.10 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क की स्थापना भी की जा रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का विस्तार, मत्स्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, विपणन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नवा अंजोर /2047‘ के अंतर्गत रायपुर, धमतरी एवं कांकेर जिलों में तिलापिया क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 37,857 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।

    कार्यक्रम में केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि, वित्तीय समावेशन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा निर्यात क्षमता को और मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में नाबार्ड, एमपीईडीए (डच्म्क्।), सीफा (ब्प्थ्।) सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में मत्स्य पालन विभाग के संचालक  एन.एस. नाग ने आभार व्यक्त किया। बढ़ी संख्या में मत्स्य किसान एवं छत्तीसगढ़ राज्य मछुआरा बोर्ड के चेयरमेन उपस्थित थे।

No comments