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कांकेर में सबसे कम तो भानुप्रतापपुर में मिली बड़ी जीत

जगदलपुर।  2019 में उपचुनाव के बाद ‘हाथ’ ने ‘कमल’ को अपने पंजे की पकड़ में लेकर शून्य कर दिया था। 2018 विधानसभा चुनाव में बस्तर की 12 सीट में...

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जगदलपुर।  2019 में उपचुनाव के बाद ‘हाथ’ ने ‘कमल’ को अपने पंजे की पकड़ में लेकर शून्य कर दिया था। 2018 विधानसभा चुनाव में बस्तर की 12 सीट में से 11 सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत अर्जित की थी और एकमात्र दंतेवाड़ा सीट पर भाजपा प्रत्याशी भीमा मंडावी जीते थे। 2019 में नक्सली हमले में भीमा मंडावी के मारे जाने के बाद उपचुनाव में भीमा की पत्नी ओजस्वी मंडावी के कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा से हार के बाद बस्तर में ‘कमल’ का फूल पूरी तरह से मुरझा गया था। लेकिन भाजपा के लिए शून्यभूमि बस्तर में पांच वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में ‘कमल’ फिर एक बार खिल उठा है। बस्तर की 12 में से आठ सीट पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत अर्जित की है, जिससे कांग्रेस चार सीट पर सिमट कर रह गई है। इसके साथ ही बस्तर ने एक बार फिर इस धारणा को स्थापित कर दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता का रास्ता बस्तर से होकर ही जाता है। बस्तर की 12 सीट में कांकेर में सबसे कम 16 वोट के अंतर से भाजपा प्रत्याशी आशाराम नेताम ने जीत दर्ज की। भानुप्रतापपुर में सावित्री मनोज मंडावी ने 30,932 मत के अंतराल से चुनाव जीता। केशकाल, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर व कोंटा विधानसभा सीट पर जीत-हार का अंतर बहुत कम रहा। कोंटा सीट पर मंत्री कवासी लखमा दो हजार से भी कम अंतर से जीते। बीजापुर सीट पर पिछली बार 22 हजार वोट से जीतने वाले विक्रम मंडावी को भाजपा प्रत्याशी महेश गागड़ा से कड़ी टक्कर मिली।

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