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बस्तर: नकली DAP खाद की बिक्री, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

  जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में खरीफ सीजन के ऐन वक्त पर किसानों के सामने खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. एक तरफ सहकारी...

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जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में खरीफ सीजन के ऐन वक्त पर किसानों के सामने खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. एक तरफ सहकारी समितियों में समय पर खाद अनुपलब्ध होने से परेशानी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मजबूरी में निजी कृषि केंद्रों का रुख कर रहे किसानों को नकली डीएपी (DAP) थमाया जा रहा है.  

स्‍थानीयसमाचार


किसानों का आरोप है कि निजी दुकानों से महंगे दामों पर खरीदी गई खाद की बोरियों से खाद के बजाय मिट्टी जैसी सामग्री निकल रही है. कई बेबस किसान इस खाद को अपने खेतों में डाल भी चुके हैं, जिससे अब उनकी तैयार हो रही फसल के खराब होने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है.


इस धोखाधड़ी से आक्रोशित भारी संख्या में किसान सोमवार को जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नुकसान की भरपाई की मांग की. अपनी शिकायत को साबित करने के लिए किसानों ने अधिकारियों के सामने ही दो अलग-अलग गिलासों में असली और नकली खाद को पानी में डालकर कृषि विभाग के अफसरों को लाइव डेमो दिखाया.  

भौगोलिकसंदर्भ


पीड़ित किसान लखेश्वर कश्यप ने बताया कि सहकारी समितियों में खाद न मिलने के कारण उन्हें ऊंचे दामों पर निजी दुकानों से खाद खरीदना पड़ा. अब उनकी सालभर की कड़ी मेहनत और पूरी खरीफ फसल दांव पर लग गई है. किसानों ने मांग की है कि उन्हें तुरंत असली खाद दी जाए या उनके पैसे वापस किए जाएं. साथ ही समय रहते राहत न मिलने पर प्रशासन उचित मुआवजा दे.


मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर कलेक्टर ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं. कृषि विभाग के सहायक संचालक अजय मिरी ने बताया कि शिकायत मिलते ही संदिग्ध खाद के सैंपल जब्त कर लैब टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं. जब तक 21 दिनों की यह जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित दुकान में खाद की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. 


विभाग के मुताबिक, जिस खाद को लेकर शिकायत आई है, उसे दंतेश्वरी कृषि केंद्र द्वारा 15 टन खरीदना बताया गया है. अब प्रशासन उन किसानों की सूची तैयार कर रहा है जिन्हें यह खाद बेची गई है. 


विभागीय अधिकारियों ने माना कि सहकारी समितियों में रकबे के आधार पर खाद देने का नियम होने और किसानों की जरूरत ज्यादा होने के कारण वे निजी केंद्रों की ओर जा रहे हैं. वहीं, इस पूरे विवाद पर आरोपी निजी कृषि केंद्र के संचालक ने मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया है.

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